सूर्य नमस्कार (Hindi Milap)

सूरज बड़ा तेजस्वी तथा शक्तिमान है। इसीलिए सभी धर्मावलंबी प्राचीन काल से सूरज की स्तुति करते रहे हैं। सूर्य रश्मि की शक्ति अपार और अनुपम है| सूर्य शक्ति न हो तो जीवन ही नहीं। इसीलिए सूर्य नमस्कार की विधि अमल में आर्यी |

सुबह और शाम जब सूर्योदय तथा सूर्यास्त होता है, तब वायु में प्राणवायु (ऑक्सीजन) अधिक रहती है। उस समय सूरज के सामने खड़े होकर सूर्य नमस्कार करते हुए आसन करें तो बड़ा लाभ होगा। इन आसनों को योग विद्या में शरीर स्थितियाँ कहते हैं। सूर्य के नाम-मंत्रों का भी निर्धारण किया गया है। एक-एक मंत्र का पाठ करते हुए 12 शारीरिक स्थितियाँ अर्थात् आसन करना चाहिए। मंत्रों के उच्चारण से शरीर और मन में शक्ति की तरंगें उत्पन्न होती हैं। मंत्रोच्चार के साथ सूर्य नमस्कार संबंधी आसन भी करें, तो सूर्य की स्फूर्ति साधक को मिलेगी। आसन करते समय विविध अवयवों पर मन को केन्द्रित करना जरूरी है। इससे ज्यादा लाभ होगा |…

Source: http://www.webmilap.com/PUBLICATIONS/DAILYHINDIMILAP/DAILYHINDI/2018/04/01/ArticleHtmls/01042018019024.shtml?Mode=1

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